Sep 19, 2008

सवाल

जवाब की तलाश में चला
खुद एक सवाल बन वापस आया है
खोया पाया की बातों से ऊपर उठ
नफा नुक्सान से दूर निकल आया है
उठा जब भी एक के जवाब के साथ
तो जवाब ख़ुद ही कर बैठा एक सवाल
और फ़िर खोज शुरू कर दी उसने जवाब की


देख भीड़ में अगोचर से चेहरे
या कुछ जाने से लोग
और जब कोई खिलखिला कर हँस देता
और देख उन्हें दौड़ते हुए अपने सपनों के पीछे
खड़े होते तरह तरह के सवाल
वह हो गया निराश
लगा जैसे कोई बड़ी सफाई से
जवाब मिटा के गायब हो गया
कोई और भी न ढूंढ पाया होगा
यही सोच उसने मायनो की किताब को आग लगा दी

पर सवाल नही जलते
और जवाब , जवाब नही मिलते