Oct 7, 2010

khali jeb खाली जेब

भागते भागते ज़िन्दगी ने कहा 
" ओ भाई रुक , ज़रा ठहर "
और समय , उसने जैसे अनसुनी सी करदी उसकी बात 
आगे बढ़ता रहा वोह, दिए बिना जवाब 


ज़िन्दगी ने सोचा 'जाने दो '
थोड़ी देर सुस्ता , पानी पी 
देखा तो दूर ..दूर तक समय दीख न पड़ा
"शायद बहोत पीछे छूट गया मैं "


फिर सारी ताकत लगा वोह भागा 
और इतना तेज़ दौड़ा 
की समय, छूट गया पीछे
निकल आया बहोत दूर 


मुड कर देखा , सोचा "जाने दो "


ज़िन्दगी ने अचानक टटोली अपनी जेब 
इस भाग दौड़ में बहोत कुछ कहाँ गिर गया...
"पता भी नहीं चला "
कभी हताश कभी खुश मन ही मन हस दिया 


और नज़र पड़ी 
आस पास सुन्दर उगते फूलों पे
"इतना गलत भी नहीं मैं शायद "
बैठ सुनने लगा वोह भवरों के गीत 


पीछे से चला आ रहा था समय 
चुपचाप, भावविहीन चेहरा लिए
ज़िन्दगी ने देखा उसे फिर से आगे जाते हुए 
और हस के कहा "जाने दो " 


उसे लगा मनो उसकी जेब फिर से भर गयी थी |


खाली जेब